अध्याय 5, श्लोक 42
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादततोऽम्बिकां परं रूपं बिभ्राणां सुमनोहरम् । ददर्श चण्डो मुण्डश्च भृत्यौ शुम्भनिशुम्भयोः ॥
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लिप्यंतरण
tato'mbikāṃ paraṃ rūpaṃ bibhrāṇāṃ sumanoharam dadarśa caṇḍo muṇḍaśca bhṛtyau śumbhaniśumbhayoḥ
अर्थ
तब शुम्भ-निशुम्भ के दो सेवक चण्ड और मुण्ड ने उस परम मनोहर रूप को धारण किए हुए अम्बिका को देखा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.42 का अर्थ क्या है?▼
तब शुम्भ-निशुम्भ के दो सेवक चण्ड और मुण्ड ने उस परम मनोहर रूप को धारण किए हुए अम्बिका को देखा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 42वाँ श्लोक है।