अध्याय 5, श्लोक 43
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादताभ्यां शुम्भाय चाख्याता सातीव सुमनोहरा । काप्यास्ते स्त्री महाराज भासयन्ती हिमाचलम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tābhyāṃ śumbhāya cākhyātā sātīva sumanoharā kāpyāste strī mahārāja bhāsayantī himācalam
अर्थ
उन दोनों ने शुम्भ से कहा: 'हे महाराज! कोई अत्यन्त मनोहर स्त्री वहाँ रह रही है, जो हिमालय को प्रकाशित कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.43 का अर्थ क्या है?▼
उन दोनों ने शुम्भ से कहा: 'हे महाराज! कोई अत्यन्त मनोहर स्त्री वहाँ रह रही है, जो हिमालय को प्रकाशित कर रही है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 43वाँ श्लोक है।