अध्याय 5, श्लोक 40
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादशरीरकोशाद्यत्तस्याः पार्वत्या निःसृताम्बिका । कौशिकीति समस्तेषु ततो लोकेषु गीयते ॥
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लिप्यंतरण
śarīrakośādyattasyāḥ pārvatyā niḥsṛtāmbikā kauśikīti samasteṣu tato lokeṣu gīyate
अर्थ
चूँकि अम्बिका पार्वती के शरीर-कोश से निकलीं, इसीलिए समस्त लोकों में वे 'कौशिकी' नाम से गाई जाती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.40 का अर्थ क्या है?▼
चूँकि अम्बिका पार्वती के शरीर-कोश से निकलीं, इसीलिए समस्त लोकों में वे 'कौशिकी' नाम से गाई जाती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 40वाँ श्लोक है।