अध्याय 9, श्लोक 37
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधमाहेश्वरीत्रिशूलेन भिन्नाः पेतुस्तथापरे । वाराहीतुण्डघातेन केचिच्चूर्णीकृता भुवि ॥
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लिप्यंतरण
māheśvarītriśūlena bhinnāḥ petustathāpare vārāhītuṇḍaghātena keciccūrṇīkṛtā bhuvi
अर्थ
कुछ अन्य माहेश्वरी के त्रिशूल से विदीर्ण होकर गिर पड़े; कुछ वाराही के थूथन के प्रहार से भूमि पर चूर्ण कर दिए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.37 का अर्थ क्या है?▼
कुछ अन्य माहेश्वरी के त्रिशूल से विदीर्ण होकर गिर पड़े; कुछ वाराही के थूथन के प्रहार से भूमि पर चूर्ण कर दिए गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 37वाँ श्लोक है।