अध्याय 9, श्लोक 34
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधतस्य निष्क्रामतो देवी प्रहस्य स्वनवत्ततः । शिरश्चिच्छेद खड्गेन ततोऽसावपतद्भुवि ॥
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लिप्यंतरण
tasya niṣkrāmato devī prahasya svanavattataḥ śiraściccheda khaḍgena tato'sāvapatadbhuvi
अर्थ
उसके निकलते ही देवी ने ज़ोर से हँसकर खड्ग से उसका सिर काट डाला; तब वह भूमि पर गिर पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.34 का अर्थ क्या है?▼
उसके निकलते ही देवी ने ज़ोर से हँसकर खड्ग से उसका सिर काट डाला; तब वह भूमि पर गिर पड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 34वाँ श्लोक है।