अध्याय 9, श्लोक 33
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधभिन्नस्य तस्य शूलेन हृदयान्निःसृतोऽपरः । महाबलो महावीर्यस्तिष्ठेति पुरुषो वदन् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
bhinnasya tasya śūlena hṛdayānniḥsṛto'paraḥ mahābalo mahāvīryastiṣṭheti puruṣo vadan
अर्थ
शूल से विदीर्ण उसके हृदय से 'ठहर!' कहता हुआ एक और महाबली, महावीर्यवान् पुरुष निकल पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.33 का अर्थ क्या है?▼
शूल से विदीर्ण उसके हृदय से 'ठहर!' कहता हुआ एक और महाबली, महावीर्यवान् पुरुष निकल पड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 33वाँ श्लोक है।