अध्याय 9, श्लोक 32
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधशूलहस्तं समायान्तं निशुम्भममरार्दनम् । हृदि विव्याध शूलेन वेगाविद्धेन चण्डिका ॥
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लिप्यंतरण
śūlahastaṃ samāyāntaṃ niśumbhamamarārdanam hṛdi vivyādha śūlena vegāviddhena caṇḍikā
अर्थ
शूल हाथ में लिए आते हुए देवद्रोही निशुम्भ को चण्डिका ने वेग से फेंके हुए शूल से हृदय में बेध दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.32 का अर्थ क्या है?▼
शूल हाथ में लिए आते हुए देवद्रोही निशुम्भ को चण्डिका ने वेग से फेंके हुए शूल से हृदय में बेध दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 32वाँ श्लोक है।