अध्याय 9, श्लोक 30
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधततो निशुम्भो वेगेन गदामादाय चण्डिकाम् । अभ्यधावत वै हन्तुं दैत्यसैन्यसमावृतः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tato niśumbho vegena gadāmādāya caṇḍikām abhyadhāvata vai hantuṃ daityasainyasamāvṛtaḥ
अर्थ
तब निशुम्भ वेग से गदा लेकर, दैत्य-सेना से घिरा हुआ, चण्डिका को मारने दौड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.30 का अर्थ क्या है?▼
तब निशुम्भ वेग से गदा लेकर, दैत्य-सेना से घिरा हुआ, चण्डिका को मारने दौड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 30वाँ श्लोक है।