अध्याय 9, श्लोक 29
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधततो भगवती क्रुद्धा दुर्गा दुर्गार्तिनाशिनी । चिच्छेद देवी चक्राणि स्वशरैः सायकांश्च तान् ॥
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लिप्यंतरण
tato bhagavatī kruddhā durgā durgārtināśinī ciccheda devī cakrāṇi svaśaraiḥ sāyakāṃśca tān
अर्थ
तब क्रुद्ध भगवती दुर्गा, दुर्गति और दुस्तर पीड़ाओं का नाश करने वाली, ने अपने बाणों से उन चक्रों और बाणों को काट डाला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.29 का अर्थ क्या है?▼
तब क्रुद्ध भगवती दुर्गा, दुर्गति और दुस्तर पीड़ाओं का नाश करने वाली, ने अपने बाणों से उन चक्रों और बाणों को काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 29वाँ श्लोक है।