अध्याय 9, श्लोक 27
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधततो निशुम्भः सम्प्राप्य चेतनामात्तकार्मुकः । आजघान शरैर्देवीं कालीं केसरिणं तथा ॥
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लिप्यंतरण
tato niśumbhaḥ samprāpya cetanāmāttakārmukaḥ ājaghāna śarairdevīṃ kālīṃ kesariṇaṃ tathā
अर्थ
तभी निशुम्भ ने होश में आकर धनुष उठाया और बाणों से देवी, काली तथा सिंह पर प्रहार किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.27 का अर्थ क्या है?▼
तभी निशुम्भ ने होश में आकर धनुष उठाया और बाणों से देवी, काली तथा सिंह पर प्रहार किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 27वाँ श्लोक है।