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दुर्गा सप्तशती 9.25

अध्याय 9, श्लोक 25

अध्याय 9: Niśumbha Vadhaनिशुम्भवध

शुम्भमुक्ताञ्छरान्देवी शुम्भस्तत्प्रहिताञ्छरान् चिच्छेद स्वशरैरुग्रैः शतशोऽथ सहस्रशः

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लिप्यंतरण

śumbhamuktāñcharāndevī śumbhastatprahitāñcharān ciccheda svaśarairugraiḥ śataśo'tha sahasraśaḥ

अर्थ

देवी ने शुम्भ के छोड़े बाणों को, और शुम्भ ने देवी के छोड़े बाणों को, अपने-अपने उग्र बाणों से सैकड़ों-हज़ारों की संख्या में काट डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 9.25 का अर्थ क्या है?
देवी ने शुम्भ के छोड़े बाणों को, और शुम्भ ने देवी के छोड़े बाणों को, अपने-अपने उग्र बाणों से सैकड़ों-हज़ारों की संख्या में काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 25वाँ श्लोक है।