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दुर्गा सप्तशती 9.23

अध्याय 9, श्लोक 23

अध्याय 9: Niśumbha Vadhaनिशुम्भवध

शुम्भेनागत्य या शक्तिर्मुक्ता ज्वालातिभीषणा आयान्ती वह्निकूटाभा सा निरस्ता महोल्कया

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लिप्यंतरण

śumbhenāgatya yā śaktirmuktā jvālātibhīṣaṇā āyāntī vahnikūṭābhā sā nirastā maholkayā

अर्थ

अग्नि-पुंज के समान देदीप्यमान, अत्यन्त भयंकर ज्वालामयी जो शक्ति शुम्भ ने आकर छोड़ी — वह (देवी की) महान् उल्का से निरस्त कर दी गई।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 9.23 का अर्थ क्या है?
अग्नि-पुंज के समान देदीप्यमान, अत्यन्त भयंकर ज्वालामयी जो शक्ति शुम्भ ने आकर छोड़ी — वह (देवी की) महान् उल्का से निरस्त कर दी गई।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 23वाँ श्लोक है।