अध्याय 9, श्लोक 22
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधदुरात्मंस्तिष्ठ तिष्ठेति व्याजहाराम्बिका यदा । तदा जयेत्यभिहितं देवैराकाशसंस्थितैः ॥
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लिप्यंतरण
durātmaṃstiṣṭha tiṣṭheti vyājahārāmbikā yadā tadā jayetyabhihitaṃ devairākāśasaṃsthitaiḥ
अर्थ
जब अम्बिका ने 'दुरात्मन्! ठहर, ठहर!' कहा, तब आकाश में स्थित देवताओं ने 'जय हो' कहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.22 का अर्थ क्या है?▼
जब अम्बिका ने 'दुरात्मन्! ठहर, ठहर!' कहा, तब आकाश में स्थित देवताओं ने 'जय हो' कहा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 22वाँ श्लोक है।