Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 9.13

अध्याय 9, श्लोक 13

अध्याय 9: Niśumbha Vadhaनिशुम्भवध

आविद्याथ गदां सोऽपि चिक्षेप चण्डिकां प्रति सापि देव्यास् त्रिशूलेन भिन्ना भस्मत्वमागता

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

āvidyātha gadāṃ so'pi cikṣepa caṇḍikāṃ prati sāpi devyās triśūlena bhinnā bhasmatvamāgatā

अर्थ

तब उसने भी गदा घुमाकर चण्डिका पर फेंकी; पर वह भी देवी के त्रिशूल से विदीर्ण होकर भस्म हो गई।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 9.13 का अर्थ क्या है?
तब उसने भी गदा घुमाकर चण्डिका पर फेंकी; पर वह भी देवी के त्रिशूल से विदीर्ण होकर भस्म हो गई।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 13वाँ श्लोक है।