अध्याय 9, श्लोक 12
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधकोपाध्मातो निशुम्भोऽथ शूलं जग्राह दानवः । आयातं मुष्टिपातेन देवी तच्चाप्यचूर्णयत् ॥
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लिप्यंतरण
kopādhmāto niśumbho'tha śūlaṃ jagrāha dānavaḥ āyātaṃ muṣṭipātena devī taccāpyacūrṇayat
अर्थ
तब क्रोध से उन्मत्त निशुम्भ दानव ने शूल पकड़ा; पर आते हुए उसे भी देवी ने मुक्के के प्रहार से चूर्ण कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.12 का अर्थ क्या है?▼
तब क्रोध से उन्मत्त निशुम्भ दानव ने शूल पकड़ा; पर आते हुए उसे भी देवी ने मुक्के के प्रहार से चूर्ण कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 12वाँ श्लोक है।