अध्याय 9, श्लोक 11
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधछिन्ने चर्मणि खड्गे च शक्तिं चिक्षेप सोऽसुरः । तामप्यस्य द्विधा चक्रे चक्रेणाभिमुखागताम् ॥
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लिप्यंतरण
chinne carmaṇi khaḍge ca śaktiṃ cikṣepa so'suraḥ tāmapyasya dvidhā cakre cakreṇābhimukhāgatām
अर्थ
ढाल और खड्ग कट जाने पर उस असुर ने शक्ति फेंकी; पर सामने आती उस शक्ति को भी देवी ने चक्र से दो टुकड़े कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.11 का अर्थ क्या है?▼
ढाल और खड्ग कट जाने पर उस असुर ने शक्ति फेंकी; पर सामने आती उस शक्ति को भी देवी ने चक्र से दो टुकड़े कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 11वाँ श्लोक है।