अध्याय 9, श्लोक 10
अध्याय 9: Niśumbha Vadha — निशुम्भवधताडिते वाहने देवी क्षुरप्रेणासिमुत्तमम् । निशुम्भस्याशु चिच्छेद चर्म चाप्यष्टचन्द्रकम् ॥
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लिप्यंतरण
tāḍite vāhane devī kṣurapreṇāsimuttamam niśumbhasyāśu ciccheda carma cāpyaṣṭacandrakam
अर्थ
वाहन के आहत होने पर देवी ने क्षुरप्र (छुरे-समान) बाण से निशुम्भ का उत्तम खड्ग और आठ चन्द्रों से अंकित ढाल भी शीघ्र काट डाली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 9.10 का अर्थ क्या है?▼
वाहन के आहत होने पर देवी ने क्षुरप्र (छुरे-समान) बाण से निशुम्भ का उत्तम खड्ग और आठ चन्द्रों से अंकित ढाल भी शीघ्र काट डाली।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 9 (Niśumbha Vadha — निशुम्भ वध) का 10वाँ श्लोक है।