अध्याय 8, श्लोक 9
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधधनुर्ज्यासिंहघण्टानां नादापूरितदिङ्मुखा । निनादैर्भीषणैः काली जिग्ये विस्तारितानना ॥
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लिप्यंतरण
dhanurjyāsiṃhaghaṇṭānāṃ nādāpūritadiṅmukhā ninādairbhīṣaṇaiḥ kālī jigye vistāritānanā
अर्थ
धनुष की टंकार, सिंह और घण्टा के नाद से दिशाओं को भरती हुई, मुख फैलाए काली ने भयंकर निनादों से (शत्रुओं को) अभिभूत कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.9 का अर्थ क्या है?▼
धनुष की टंकार, सिंह और घण्टा के नाद से दिशाओं को भरती हुई, मुख फैलाए काली ने भयंकर निनादों से (शत्रुओं को) अभिभूत कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 9वाँ श्लोक है।