अध्याय 8, श्लोक 55
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधभक्ष्यमाणास्त्वया चोग्रा न चोत्पत्स्यन्ति चापरे । इत्युक्त्वा तां ततो देवी शूलेनाभिजघान तम् ॥
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लिप्यंतरण
bhakṣyamāṇāstvayā cogrā na cotpatsyanti cāpare ityuktvā tāṃ tato devī śūlenābhijaghāna tam
अर्थ
तुम्हारे द्वारा भक्षण किए जाते हुए ये उग्र (असुर नष्ट हो जाएँगे), और दूसरे उत्पन्न न होंगे।' ऐसा कहकर तब देवी ने उसे शूल से मारा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.55 का अर्थ क्या है?▼
तुम्हारे द्वारा भक्षण किए जाते हुए ये उग्र (असुर नष्ट हो जाएँगे), और दूसरे उत्पन्न न होंगे।' ऐसा कहकर तब देवी ने उसे शूल से मारा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 55वाँ श्लोक है।