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दुर्गा सप्तशती 8.54

अध्याय 8, श्लोक 54

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

भक्षयन्ती चरन् रणे तदुत्पन्नान्महासुरान् एवमेष क्षयं दैत्यः क्षेणरक्तो गमिष्यति

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लिप्यंतरण

bhakṣayantī caran raṇe tadutpannānmahāsurān evameṣa kṣayaṃ daityaḥ kṣeṇarakto gamiṣyati

अर्थ

उससे उत्पन्न महान् असुरों को खाती हुई रणभूमि में विचरो; इस प्रकार यह दैत्य रक्तहीन होकर नाश को प्राप्त होगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.54 का अर्थ क्या है?
उससे उत्पन्न महान् असुरों को खाती हुई रणभूमि में विचरो; इस प्रकार यह दैत्य रक्तहीन होकर नाश को प्राप्त होगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 54वाँ श्लोक है।