अध्याय 8, श्लोक 52
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधतान् विषण्णान् सुरान् दृष्ट्वा चण्डिका प्राहसत्वरम् । उवाच कालीं चामुण्डे विस्तीर्णं वदनं कुरु ॥
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लिप्यंतरण
tān viṣaṇṇān surān dṛṣṭvā caṇḍikā prāhasatvaram uvāca kālīṃ cāmuṇḍe vistīrṇaṃ vadanaṃ kuru
अर्थ
देवताओं को विषण्ण देख चण्डिका ने हँसकर शीघ्र ही काली से कहा: 'हे चामुण्डे! अपना मुख विस्तृत करो!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.52 का अर्थ क्या है?▼
देवताओं को विषण्ण देख चण्डिका ने हँसकर शीघ्र ही काली से कहा: 'हे चामुण्डे! अपना मुख विस्तृत करो!
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 52वाँ श्लोक है।