अध्याय 8, श्लोक 51
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधतैश्चासुरासृक्सम्भूतैरसुरैः सकलं जगत् । व्याप्तमासीत्ततो देवा भयमाजग्मुरुत्तमम् ॥
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लिप्यंतरण
taiścāsurāsṛksambhūtairasuraiḥ sakalaṃ jagat vyāptamāsīttato devā bhayamājagmuruttamam
अर्थ
और असुर के रक्त से उत्पन्न उन असुरों से सम्पूर्ण जगत् व्याप्त हो गया; तब देवता अत्यन्त भयभीत हो उठे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.51 का अर्थ क्या है?▼
और असुर के रक्त से उत्पन्न उन असुरों से सम्पूर्ण जगत् व्याप्त हो गया; तब देवता अत्यन्त भयभीत हो उठे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 51वाँ श्लोक है।