अध्याय 8, श्लोक 50
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधतस्याहतस्य बहुधा शक्तिशूलादिभिर्भुवि । पपात यो वै रक्तौघस्तेनासञ्छतशोऽसुराः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
tasyāhatasya bahudhā śaktiśūlādibhirbhuvi papāta yo vai raktaughastenāsañchataśo'surāḥ
अर्थ
शक्ति, शूल आदि से अनेक स्थानों पर आहत उससे जो रक्त-धारा भूमि पर गिरी, उससे सैकड़ों असुर उत्पन्न हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.50 का अर्थ क्या है?▼
शक्ति, शूल आदि से अनेक स्थानों पर आहत उससे जो रक्त-धारा भूमि पर गिरी, उससे सैकड़ों असुर उत्पन्न हो गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 50वाँ श्लोक है।