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दुर्गा सप्तशती 8.49

अध्याय 8, श्लोक 49

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

चापि गदया दैत्यः सर्वा एवाहनत् पृथक् मातॄः कोपसमाविष्टो रक्तबीजो महासुरः

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लिप्यंतरण

sa cāpi gadayā daityaḥ sarvā evāhanat pṛthak mātṝḥ kopasamāviṣṭo raktabījo mahāsuraḥ

अर्थ

और वह दैत्य रक्तबीज महान् असुर क्रोध से भरकर गदा से समस्त मातृकाओं को अलग-अलग मारने लगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.49 का अर्थ क्या है?
और वह दैत्य रक्तबीज महान् असुर क्रोध से भरकर गदा से समस्त मातृकाओं को अलग-अलग मारने लगा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 49वाँ श्लोक है।