अध्याय 8, श्लोक 47
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधवैष्णवीचक्रभिन्नस्य रुधिरस्रावसम्भवैः । सहस्रशो जगद्व्याप्तं तत्प्रमाणैर्महासुरैः ॥
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लिप्यंतरण
vaiṣṇavīcakrabhinnasya rudhirasrāvasambhavaiḥ sahasraśo jagadvyāptaṃ tatpramāṇairmahāsuraiḥ
अर्थ
वैष्णवी के चक्र से विदीर्ण उससे बहती रक्त-धाराओं से उत्पन्न उसी के बराबर के महान् असुरों से सहस्रों की संख्या में जगत् भर गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.47 का अर्थ क्या है?▼
वैष्णवी के चक्र से विदीर्ण उससे बहती रक्त-धाराओं से उत्पन्न उसी के बराबर के महान् असुरों से सहस्रों की संख्या में जगत् भर गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 47वाँ श्लोक है।