अध्याय 8, श्लोक 45
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधपुनश्च वज्रपातेन क्षतमस्य शिरो यदा । ववाह रक्तं पुरुषास्ततो जाताः सहस्रशः ॥
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लिप्यंतरण
punaśca vajrapātena kṣatamasya śiro yadā vavāha raktaṃ puruṣāstato jātāḥ sahasraśaḥ
अर्थ
और फिर जब वज्र के प्रहार से उसका सिर घायल हुआ, तब रक्त बहा, और उससे हज़ारों पुरुष उत्पन्न हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.45 का अर्थ क्या है?▼
और फिर जब वज्र के प्रहार से उसका सिर घायल हुआ, तब रक्त बहा, और उससे हज़ारों पुरुष उत्पन्न हो गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 45वाँ श्लोक है।