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दुर्गा सप्तशती 8.43

अध्याय 8, श्लोक 43

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

यावन्तः पतितास्तस्य शरीराद्रक्तबिन्दवः तावन्तः पुरुषा जातास्तद्वीर्यबलविक्रमाः

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लिप्यंतरण

yāvantaḥ patitāstasya śarīrādraktabindavaḥ tāvantaḥ puruṣā jātāstadvīryabalavikramāḥ

अर्थ

उसके शरीर से जितनी रक्त की बूँदें गिरीं, उतने ही उसके बल, वीर्य और पराक्रम वाले पुरुष उत्पन्न हो गए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.43 का अर्थ क्या है?
उसके शरीर से जितनी रक्त की बूँदें गिरीं, उतने ही उसके बल, वीर्य और पराक्रम वाले पुरुष उत्पन्न हो गए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 43वाँ श्लोक है।