Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 8.35

अध्याय 8, श्लोक 35

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

तुण्डप्रहारविध्वस्ता दंष्ट्राग्रक्षतवक्षसः वाराहमूर्त्या न्यपतंश्चक्रेण विदारिताः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

tuṇḍaprahāravidhvastā daṃṣṭrāgrakṣatavakṣasaḥ vārāhamūrtyā nyapataṃścakreṇa ca vidāritāḥ

अर्थ

थूथन के प्रहार से ध्वस्त, दाँतों के अग्रभाग से वक्ष-स्थल पर घायल और चक्र से विदीर्ण होकर असुर वाराही के समक्ष गिर पड़े।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.35 का अर्थ क्या है?
थूथन के प्रहार से ध्वस्त, दाँतों के अग्रभाग से वक्ष-स्थल पर घायल और चक्र से विदीर्ण होकर असुर वाराही के समक्ष गिर पड़े।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 35वाँ श्लोक है।