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दुर्गा सप्तशती 8.34

अध्याय 8, श्लोक 34

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

ऐन्द्री कुलिशपातेन शतशो दैत्यदानवाः पेतुर्विदारिताः पृथ्व्यां रुधिरौघप्रवर्षिणः

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लिप्यंतरण

aindrī kuliśapātena śataśo daityadānavāḥ peturvidāritāḥ pṛthvyāṃ rudhiraughapravarṣiṇaḥ

अर्थ

ऐन्द्री के वज्र-प्रहार से दैत्य और दानव सैकड़ों की संख्या में विदीर्ण होकर रक्त की धाराएँ बहाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़े।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.34 का अर्थ क्या है?
ऐन्द्री के वज्र-प्रहार से दैत्य और दानव सैकड़ों की संख्या में विदीर्ण होकर रक्त की धाराएँ बहाते हुए पृथ्वी पर गिर पड़े।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 34वाँ श्लोक है।