अध्याय 8, श्लोक 33
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधमाहेश्वरी त्रिशूलेन तथा चक्रेण वैष्णवी । दैत्याञ्जघान कौमारी तथा शक्त्यातिकोपना ॥
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लिप्यंतरण
māheśvarī triśūlena tathā cakreṇa vaiṣṇavī daityāñjaghāna kaumārī tathā śaktyātikopanā
अर्थ
माहेश्वरी ने त्रिशूल से, वैष्णवी ने चक्र से, और अत्यन्त क्रुद्ध कौमारी ने शक्ति से दैत्यों का वध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.33 का अर्थ क्या है?▼
माहेश्वरी ने त्रिशूल से, वैष्णवी ने चक्र से, और अत्यन्त क्रुद्ध कौमारी ने शक्ति से दैत्यों का वध किया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 33वाँ श्लोक है।