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दुर्गा सप्तशती 8.32

अध्याय 8, श्लोक 32

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

कमण्डलुजलाक्षेपहतवीर्यान् हतौजसः ब्रह्माणी चाकरोच्छत्रून्येन येन स्म धावति

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लिप्यंतरण

kamaṇḍalujalākṣepahatavīryān hataujasaḥ brahmāṇī cākarocchatrūnyena yena sma dhāvati

अर्थ

ब्राह्मणी जहाँ-जहाँ दौड़तीं, वहाँ-वहाँ कमण्डलु के जल के छींटों से शत्रुओं के वीर्य और ओज को हर लेतीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.32 का अर्थ क्या है?
ब्राह्मणी जहाँ-जहाँ दौड़तीं, वहाँ-वहाँ कमण्डलु के जल के छींटों से शत्रुओं के वीर्य और ओज को हर लेतीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 32वाँ श्लोक है।