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दुर्गा सप्तशती 8.30

अध्याय 8, श्लोक 30

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

सा तान् प्रहितान् बाणाञ्छूलशक्तिपरश्वधान् चिच्छेद लीलयाध्मातधनुर्मुक्तैर्महेषुभिः

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लिप्यंतरण

sā ca tān prahitān bāṇāñchūlaśaktiparaśvadhān ciccheda līlayādhmātadhanurmuktairmaheṣubhiḥ

अर्थ

और उन्होंने खींचे हुए टंकारते धनुष से छोड़े गए महान् बाणों से उन फेंके हुए बाणों, शूलों, शक्तियों और परशुओं को मानो खेल-खेल में ही काट डाला।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.30 का अर्थ क्या है?
और उन्होंने खींचे हुए टंकारते धनुष से छोड़े गए महान् बाणों से उन फेंके हुए बाणों, शूलों, शक्तियों और परशुओं को मानो खेल-खेल में ही काट डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 30वाँ श्लोक है।