अध्याय 8, श्लोक 22
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधततो देवीशरीरात्तु विनिष्क्रान्तातिभीषणा । चण्डिका शक्तिरत्युग्रा शिवाशतनिनादिनी ॥
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लिप्यंतरण
tato devīśarīrāttu viniṣkrāntātibhīṣaṇā caṇḍikā śaktiratyugrā śivāśataninādinī
अर्थ
तभी देवी के शरीर से चण्डिका की अत्यन्त भयंकर और उग्र शक्ति निकली, जो सौ शिवाओं (शृगालियों) के समान गरजने वाली थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.22 का अर्थ क्या है?▼
तभी देवी के शरीर से चण्डिका की अत्यन्त भयंकर और उग्र शक्ति निकली, जो सौ शिवाओं (शृगालियों) के समान गरजने वाली थी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 22वाँ श्लोक है।