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दुर्गा सप्तशती 8.21

अध्याय 8, श्लोक 21

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

ततः परिवृतस्ताभिरीशानो देवशक्तिभिः हन्यन्तामसुराः शीघ्रं मम प्रीत्याह चण्डिकाम्

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लिप्यंतरण

tataḥ parivṛtastābhirīśāno devaśaktibhiḥ hanyantāmasurāḥ śīghraṃ mama prītyāha caṇḍikām

अर्थ

तब उन देव-शक्तियों से घिरे ईशान (शिव) ने चण्डिका से कहा: 'मेरी प्रसन्नता के लिए असुर शीघ्र मारे जाएँ।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.21 का अर्थ क्या है?
तब उन देव-शक्तियों से घिरे ईशान (शिव) ने चण्डिका से कहा: 'मेरी प्रसन्नता के लिए असुर शीघ्र मारे जाएँ।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 21वाँ श्लोक है।