अध्याय 8, श्लोक 20
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधवज्रहस्ता तथैवैन्द्री गजराजोपरि स्थिता । प्राप्ता सहस्रनयना यथा शक्रस्तथैव सा ॥
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लिप्यंतरण
vajrahastā tathaivaindrī gajarājopari sthitā prāptā sahasranayanā yathā śakrastathaiva sā
अर्थ
वैसे ही ऐन्द्री वज्र हाथ में लिए गजराज पर विराजमान आईं — सहस्र नेत्रों वाली, ठीक इन्द्र (शक्र) के समान।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.20 का अर्थ क्या है?▼
वैसे ही ऐन्द्री वज्र हाथ में लिए गजराज पर विराजमान आईं — सहस्र नेत्रों वाली, ठीक इन्द्र (शक्र) के समान।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 20वाँ श्लोक है।