अध्याय 8, श्लोक 2
अध्याय 8: Raktabīja Vadha — रक्तबीजवधततः कोपपराधीनचेताः शुम्भः प्रतापवान् । उद्योगं सर्वसैन्यानां दैत्यानामादिदेश ह ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ kopaparādhīnacetāḥ śumbhaḥ pratāpavān udyogaṃ sarvasainyānāṃ daityānāmādideśa ha
अर्थ
तब प्रतापी शुम्भ ने, जिसका चित्त क्रोध के अधीन हो गया था, समस्त दैत्य-सेनाओं को सन्नद्ध होने की आज्ञा दी:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 8.2 का अर्थ क्या है?▼
तब प्रतापी शुम्भ ने, जिसका चित्त क्रोध के अधीन हो गया था, समस्त दैत्य-सेनाओं को सन्नद्ध होने की आज्ञा दी:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 2वाँ श्लोक है।