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दुर्गा सप्तशती 8.18

अध्याय 8, श्लोक 18

अध्याय 8: Raktabīja Vadhaरक्तबीजवध

यज्ञवाराहमतुलं रूपं या बिभ्रतो हरेः शक्तिः साप्याययौ तत्र वाराहीं बिभ्रती तनुम्

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लिप्यंतरण

yajñavārāhamatulaṃ rūpaṃ yā bibhrato hareḥ śaktiḥ sāpyāyayau tatra vārāhīṃ bibhratī tanum

अर्थ

जो यज्ञ-वराह का अतुलनीय रूप धारण करते हैं, उन हरि की शक्ति भी वाराही का शरीर धारण कर वहाँ आईं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 8.18 का अर्थ क्या है?
जो यज्ञ-वराह का अतुलनीय रूप धारण करते हैं, उन हरि की शक्ति भी वाराही का शरीर धारण कर वहाँ आईं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 8 (Raktabīja Vadha — रक्तबीज वध) का 18वाँ श्लोक है।