Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 7.5

अध्याय 7, श्लोक 5

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

भ्रुकुटीकुटिलात्तस्या ललाटफलकाद्द्रुतम् काली करालवदना विनिष्क्रान्तासिपाशिनी

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

bhrukuṭīkuṭilāttasyā lalāṭaphalakāddrutam kālī karālavadanā viniṣkrāntāsipāśinī

अर्थ

उनके भौंहों से टेढ़े हुए ललाट-पटल से सहसा काली प्रकट हुईं, जो विकराल मुख वाली, खड्ग और पाश धारण किए हुए थीं,

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.5 का अर्थ क्या है?
उनके भौंहों से टेढ़े हुए ललाट-पटल से सहसा काली प्रकट हुईं, जो विकराल मुख वाली, खड्ग और पाश धारण किए हुए थीं,
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 5वाँ श्लोक है।