अध्याय 7, श्लोक 4
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधततः कोपं चकारोच्चैरम्बिका तानरीन्प्रति । कोपेन चास्या वदनं मषीवर्णमभूत्तदा ॥
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लिप्यंतरण
tataḥ kopaṃ cakāroccairambikā tānarīnprati kopena cāsyā vadanaṃ maṣīvarṇamabhūttadā
अर्थ
तब अम्बिका उन शत्रुओं पर अत्यन्त क्रुद्ध हुईं; और क्रोध से उनका मुख उस समय स्याही के समान काला हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.4 का अर्थ क्या है?▼
तब अम्बिका उन शत्रुओं पर अत्यन्त क्रुद्ध हुईं; और क्रोध से उनका मुख उस समय स्याही के समान काला हो गया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 4वाँ श्लोक है।