अध्याय 7, श्लोक 24
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधऋषिरुवाच तावानीतौ ततो दृष्ट्वा चण्डमुण्डौ महासुरौ । उवाच कालीं कल्याणी ललितं चण्डिका वचः ॥
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लिप्यंतरण
ṛṣiruvāca tāvānītau tato dṛṣṭvā caṇḍamuṇḍau mahāsurau uvāca kālīṃ kalyāṇī lalitaṃ caṇḍikā vacaḥ
अर्थ
(ऋषि बोले —) तब चण्ड और मुण्ड — इन दोनों महान् असुरों को लाया हुआ देखकर कल्याणी चण्डिका ने काली से यह मधुर वचन कहा:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.24 का अर्थ क्या है?▼
(ऋषि बोले —) तब चण्ड और मुण्ड — इन दोनों महान् असुरों को लाया हुआ देखकर कल्याणी चण्डिका ने काली से यह मधुर वचन कहा:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 24वाँ श्लोक है।