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दुर्गा सप्तशती 7.22

अध्याय 7, श्लोक 22

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

शिरश्चण्डस्य काली गृहीत्वा मुण्डमेव प्राह प्रचण्डाट्टहासमिश्रमभ्येत्य चण्डिकाम्

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लिप्यंतरण

śiraścaṇḍasya kālī ca gṛhītvā muṇḍameva ca prāha pracaṇḍāṭṭahāsamiśramabhyetya caṇḍikām

अर्थ

और काली चण्ड तथा मुण्ड दोनों के सिर लेकर चण्डिका के पास आईं और प्रचण्ड अट्टहास से मिश्रित वचन बोलीं:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.22 का अर्थ क्या है?
और काली चण्ड तथा मुण्ड दोनों के सिर लेकर चण्डिका के पास आईं और प्रचण्ड अट्टहास से मिश्रित वचन बोलीं:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 22वाँ श्लोक है।