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दुर्गा सप्तशती 7.2

अध्याय 7, श्लोक 2

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

ददृशुस्ते ततो देवीमीषद्धासां व्यवस्थिताम् सिंहस्योपरि शैलेन्द्रश‍ृङ्गे महति काञ्चने

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लिप्यंतरण

dadṛśuste tato devīmīṣaddhāsāṃ vyavasthitām siṃhasyopari śailendraśa‍ṛṅge mahati kāñcane

अर्थ

तब उन्होंने पर्वतराज के एक विशाल स्वर्णिम शिखर पर सिंह के ऊपर विराजमान, किंचित् मुस्कुराती देवी को देखा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.2 का अर्थ क्या है?
तब उन्होंने पर्वतराज के एक विशाल स्वर्णिम शिखर पर सिंह के ऊपर विराजमान, किंचित् मुस्कुराती देवी को देखा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 2वाँ श्लोक है।