अध्याय 7, श्लोक 18
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधततो जहासातिरुषा भीमं भैरवनादिनी । काली करालवदना दुर्दर्शदशनोज्ज्वला ॥
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लिप्यंतरण
tato jahāsātiruṣā bhīmaṃ bhairavanādinī kālī karālavadanā durdarśadaśanojjvalā
अर्थ
तब विकराल मुख वाली, भयंकर गर्जना करने वाली, दुर्दर्श दाँतों से उज्ज्वल काली अत्यन्त क्रोध से भयानक अट्टहास करने लगीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.18 का अर्थ क्या है?▼
तब विकराल मुख वाली, भयंकर गर्जना करने वाली, दुर्दर्श दाँतों से उज्ज्वल काली अत्यन्त क्रोध से भयानक अट्टहास करने लगीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 18वाँ श्लोक है।