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दुर्गा सप्तशती 7.17

अध्याय 7, श्लोक 17

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

तानि चक्राण्यनेकानि विशमानानि तन्मुखम् बभुर्यथार्कबिम्बानि सुबहूनि घनोदरम्

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लिप्यंतरण

tāni cakrāṇyanekāni viśamānāni tanmukham babhuryathārkabimbāni subahūni ghanodaram

अर्थ

उनके मुख में प्रवेश करते वे अनेक चक्र ऐसे शोभित हुए मानो बहुत-से सूर्यबिम्ब मेघ के उदर में समा रहे हों।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.17 का अर्थ क्या है?
उनके मुख में प्रवेश करते वे अनेक चक्र ऐसे शोभित हुए मानो बहुत-से सूर्यबिम्ब मेघ के उदर में समा रहे हों।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 17वाँ श्लोक है।