अध्याय 7, श्लोक 16
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधशरवर्षैर्महाभीमैर्भीमाक्षीं तां महासुरः । छादयामास चक्रैश्च मुण्डः क्षिप्तैः सहस्रशः ॥
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लिप्यंतरण
śaravarṣairmahābhīmairbhīmākṣīṃ tāṃ mahāsuraḥ chādayāmāsa cakraiśca muṇḍaḥ kṣiptaiḥ sahasraśaḥ
अर्थ
महान् असुर चण्ड ने उस भयंकर नेत्रों वाली देवी को भयानक बाणों की वर्षा से, और मुण्ड ने हज़ारों फेंके हुए चक्रों से ढक दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.16 का अर्थ क्या है?▼
महान् असुर चण्ड ने उस भयंकर नेत्रों वाली देवी को भयानक बाणों की वर्षा से, और मुण्ड ने हज़ारों फेंके हुए चक्रों से ढक दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 16वाँ श्लोक है।