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दुर्गा सप्तशती 7.15

अध्याय 7, श्लोक 15

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

क्षणेन तद्बलं सर्वमसुराणां निपातितम् दृष्ट्वा चण्डोऽभिदुद्राव तां कालीमतिभीषणाम्

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लिप्यंतरण

kṣaṇena tadbalaṃ sarvamasurāṇāṃ nipātitam dṛṣṭvā caṇḍo'bhidudrāva tāṃ kālīmatibhīṣaṇām

अर्थ

क्षण भर में असुरों की वह समस्त सेना धराशायी हो गई। यह देखकर चण्ड उस अत्यन्त भयानक काली पर झपटा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.15 का अर्थ क्या है?
क्षण भर में असुरों की वह समस्त सेना धराशायी हो गई। यह देखकर चण्ड उस अत्यन्त भयानक काली पर झपटा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 15वाँ श्लोक है।