अध्याय 7, श्लोक 11
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधएकं जग्राह केशेषु ग्रीवायामथ चापरम् । पादेनाक्रम्य चैवान्यमुरसान्यमपोथयत् ॥
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लिप्यंतरण
ekaṃ jagrāha keśeṣu grīvāyāmatha cāparam pādenākramya caivānyamurasānyamapothayat
अर्थ
किसी को केश से, किसी को गर्दन से पकड़ लिया; किसी को चरण से कुचलकर और किसी अन्य को वक्षःस्थल से मसल डाला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.11 का अर्थ क्या है?▼
किसी को केश से, किसी को गर्दन से पकड़ लिया; किसी को चरण से कुचलकर और किसी अन्य को वक्षःस्थल से मसल डाला।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 11वाँ श्लोक है।