अध्याय 7, श्लोक 12
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधतैर्मुक्तानि च शस्त्राणि महास्त्राणि तथासुरैः । मुखेन जग्राह रुषा दशनैर्मथितान्यपि ॥
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लिप्यंतरण
tairmuktāni ca śastrāṇi mahāstrāṇi tathāsuraiḥ mukhena jagrāha ruṣā daśanairmathitānyapi
अर्थ
और उन असुरों द्वारा छोड़े गए शस्त्र-अस्त्रों को उन्होंने मुख से पकड़कर क्रोध से दाँतों से चूर-चूर कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.12 का अर्थ क्या है?▼
और उन असुरों द्वारा छोड़े गए शस्त्र-अस्त्रों को उन्होंने मुख से पकड़कर क्रोध से दाँतों से चूर-चूर कर दिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 12वाँ श्लोक है।