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दुर्गा सप्तशती 7.10

अध्याय 7, श्लोक 10

अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadhaचण्डमुण्डवध

तथैव योधं तुरगै रथं सारथिना सह निक्षिप्य वक्त्रे दशनैश्चर्वयन्त्यतिभैरवम्

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लिप्यंतरण

tathaiva yodhaṃ turagai rathaṃ sārathinā saha nikṣipya vaktre daśanaiścarvayantyatibhairavam

अर्थ

इसी प्रकार योद्धा को घोड़ों, रथ और सारथि सहित मुख में डालकर वे अत्यन्त भयंकर रीति से दाँतों से चबा डालती थीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 7.10 का अर्थ क्या है?
इसी प्रकार योद्धा को घोड़ों, रथ और सारथि सहित मुख में डालकर वे अत्यन्त भयंकर रीति से दाँतों से चबा डालती थीं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 10वाँ श्लोक है।