अध्याय 7, श्लोक 9
अध्याय 7: Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्डमुण्डवधपार्ष्णिग्राहाङ्कुशग्राहयोधघण्टासमन्वितान् । समादायैकहस्तेन मुखे चिक्षेप वारणान् ॥
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लिप्यंतरण
pārṣṇigrāhāṅkuśagrāhayodhaghaṇṭāsamanvitān samādāyaikahastena mukhe cikṣepa vāraṇān
अर्थ
उन्होंने हाथियों को — उनके पृष्ठरक्षकों, महावतों, योद्धाओं और घण्टों सहित — एक ही हाथ से पकड़कर मुख में डाल लिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 7.9 का अर्थ क्या है?▼
उन्होंने हाथियों को — उनके पृष्ठरक्षकों, महावतों, योद्धाओं और घण्टों सहित — एक ही हाथ से पकड़कर मुख में डाल लिया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 7 (Caṇḍa-Muṇḍa Vadha — चण्ड-मुण्ड वध) का 9वाँ श्लोक है।